कहनी थी. तुमसे कुछ बाते,
मगर लिखी रह गयी
पूछना था हाले दिल तुम्हारा,
पूछना था हाले दिल तुम्हारा,
जुबान सिली रह गयी
जताना था प्यार अपना
कराना था मेरे होने का अहसास
सब जज़्बात मेरे
मगर ख़याली ही रह गए
कुछ शिकायते भी थी तुमसे
जानने थे तुम्हारे शिकवे भी
मगर चिट्ठी अधूरी रह गयी
कल कर लेंगे, कल पूछ लेंगे
कुछ कदम कम पड़ गए
कुछ समय कम पड़ गया
बस हम अकेले रह गए
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